दाल रोटी चावल सदियों से नारी ने इसे पका पका कर राज्य किया हैं , दिलो पर , घरो पर। आज नारी बहुत आगे जा रही हैं सब विधाओं मे पर इसका मतलब ये नहीं हैं कि वो अपना राज पाट त्याग कर कुछ हासिल करना चाहती हैं। रसोई की मिलकियत पर से हम अपना हक़ तो नहीं छोडेगे पर इस राज पाट का कुछ हिस्सा पुरुषो ने होटल और कुछ घरो मे भी ले लिया हैं।

हम जहाँ जहाँ ये वहाँ वहाँ

Saturday, June 14, 2008

किशोर बच्चों की पाक कला : चपाती या बाज़ार की रोटी का पिजा

कभी कभी किशोर बच्चों को भी रसोई घर में जाने की छूट होनी चाहिए... हमारे दोनों बेटे कभी भी किसी भी समय रसोई घर में जाने के लिए आजाद हैं.. जैसे हम और हमारे पतिदेव... शुरू शुरू में बिखरा बिखरा सा लगेगा लेकिन जल्दी ही रसोई घर में जाने वाला समझ जाता है कि साफ सुथरी रसोई में दाखिल हुआ था सो साफ करके ही बाहर निकलना है...

चपाती या बाज़ार की रोटी - २-३
एक टुकडा - मज़रोला चीज़
तीन बड़े चम्मच - टमाटर का पेस्ट
स्वादानुसार - थायम /बासिल /ओर्गेनो (जो भी मसाला सुविधानुसार मिल जाए )

ओवेन की ट्रे में अल्मुनियम फोयल बिछा दें.... फ़िर उस पर दो चपाती या बाज़ार की रोटी जिसे यहाँ खुबुज़ कहा जाता है.
रख कर उस पर टमाटर का पेस्ट लगा दें.. चीज़ को ग्रेट करें
और समान रूप से ऊपर बिछा दें... फ़िर उस पर तीनों या कोई एक मसाला छिड़क दें... अगर तीनो मसाले नही हैं या आप नही डालना चाहते या तीखा स्वाद देना है तो कोई भी मिर्ची वाली सॉस डाल सकते हैं...


पहले से गर्म ओवेन में २-३ मिनट के लिए पकने दें ....
गैस पर भी नॉन स्टिक पेन रखकर एक एक करके हल्की आग पर चीज़ पिघलने तक पकाया जा सकता है बस हो गया होम मेड पिजा तैयार...
अब अगर बच्चे पहले दो निवाले खा भी लें तो कोई बात नही...बच्चे तो बच्चे हैं... हमें तो पिजा की खुशबू इतनी लुभा रही थी कि फौरन मुह में एक निवाला हमने भी डाल कर पिजा का आनंद लिया...

Thursday, June 12, 2008

कटहल का कबाब

वैसे भी आज कल बारिश का मौसम है।और कटहल का भी मौसम है। तो पकौड़ी से थोड़ा हटकर कुछ क्यों ना बनाया जाए।तो चलिए आज कटहल का कबाब ही बना लेते है।कटहल का कबाब बनाना बहुत ही आसान है और खाने मे भी बहुत अच्छा होता है।

सामग्री--
कटहल --१/२ किलो
चने की दाल-- १ छोटी कटोरी
प्याज(मीडियम )--१ कटा हुआ
लहसुन--५-६ छिले हुए
अदरक-- थोड़ा सा कटा हुआ
लौंग --२-३
बड़ी
और छोटी इलाइची --२-३
दालचीनी --एक छोटा टुकडा
जावित्री --छोटा टुकडा
जायफल -- जरा सा
कालीमिर्च -- ८-१० दाने
साबुत लाल मिर्च--१
साबुत धनिया --१ छोटा चम्मच
नमक --स्वादानुसार
रिफाइंड आयल -- सेकने के लिए
प्याज --२ गोल-गोल लच्छे कटे हुए

विधि--
बस रिफाईंड आयल और गोल प्याज के लच्चे छोड़कर सारी सामग्री को कुकर मे १ कप पानी के साथ चढा दे और ३-४ सीटी बजने के बाद बंद कर दे। कुकर खोलकर देखें अगर पानी है तो आंच पर पानी सुखा ले और थोड़ा ठंडा होने पर मिक्सी मे पीस ले।और इसके गोल-गोल कबाब बना ले ।
अब एक तवे पर थोड़ा सा आयल डालकर ये कबाब सेक ले और सर्व करने के पहले हर कबाब पर प्याज के गोल-गोल लच्चे रक्खे और बस जैसे इच्छा हो खाएं। पराठे के साथ ,दाल-चावल के साथ या सिर्फ़ कबाब को हरी धनिया की चटपटी चटनी के साथ भी खा सकते है।

नोट--फोटो तो लगानी थी पर कबाब खाने के बाद लिखने की याद आई। :)

Tuesday, June 10, 2008

नन्हें मुन्नों के लिए टेस्टी क्ले

नन्हें मुन्नों के लिए भी एक स्वादिष्ट व्यंजन होना चाहिए....यह सोचा तो बच्चों का बचपन याद आ गया, साथ ही याद आया उनका मिटटी खाना.. फ़िर याद आया कि कैसे अपने बच्चों को बहलाते और मिटटी से दूर रखते थे ..पार्क जाने से पहले दिन में एक बार घर में ही मिटटी बना कर खेल खेल में खिलाते और फ़िर बाहर निकलते .... आप भी आजमा कर देखिये...





चार बड़े चम्मच = पीनट बटर
एक बड़ा चम्मच = शहद
एक कप = मिल्क पाउडर

अपने हाथ अच्छी तरह धोकर एक खुली थाली में सब चीजों को एक साथ मिला कर आटे की तरह गूँथ लें.... फ़िर अलग अलग आकार में बच्चों के सामने परोस दें.... खाने को बिल्कुल न कहें..बस आकार बना बना कर उनके सामने रखते रहें और उन्हें तोड़ने दें...
बच्चे अगर खेल खेल में एक छोटा चम्मच भी खा लें तो बहुत है... बची हुई मिटटी को डिब्बे में बंद करके फ्रिज़ में रखें... अगले दिन कोशिश करें नही तो कड़क टोस्ट पर लगा कर शाम के नाश्ते में दूध के साथ बड़े बच्चों को दें और ख़ुद भी चाय के साथ लें सकते हैं... ... (अगर कैलोरी को जला सकते हैं तो ...)

Saturday, June 7, 2008

रसेदार छल्ली



दाल रोटी चावल के परिचय में अनीताजी ने रसेदार छल्ली का जिक्र किया है.अभी कुछ दिनों पहले बिटिया के साथ लाजपतनगर जाना हुआ.लौटते हुए शाम हो गई और हम दोनों को भूख लग आई.ऐसे में हमारी नासिका में कोर्न की खुशबू चली आई.जैसे ही हम उधर बढे,एक कोने में हमें एक बूढे बाबा दिखे जो रसेदार छल्ली बेच रहे थे. पंजाबी में भुट्टे को छल्ली कहा जाता है.छल्ली वाले बाबा के इर्द-गिर्द महिलाओं की अच्छी खासी भीड जमा थी.जब तक हमारा नम्बर आया, तब तक बाबा फ़्री हो चुके थे.जैसे ही रसेदार छल्ली में दांत गडाये, अनीता जी का विवरण आंखों के सामने घूम गया.सचमुच लार ग्रन्थियां और अश्रु ग्रंथियां ओवरटाइम काम करने लगी थी.अपनी हंसी को रोकते हुए हमने बाबा से छल्ली की तारीफ़ करते हुए उसे बनाने की विधि पूछी तो थोडी नानुकुर के साथ बाबा ने हमको रसेदार छल्ली बनाने का तरीका बता दिया.आजकल बाज़ार में अमेरिकन स्वीट कोर्न वाला नर्म, मीठा भुट्टा मिलता है, मेरी गुजारिश है कि हो सके तो यही भुट्टा काम में लायें.तो अनीताजी और बाकी सभी सखियां तैयार हो जाइये रसेदार छल्ली बनाने के लिये.

सामग्री:

साबुत भुट्टे (कच्चे,नर्म)--------- ४ नग
पीला मक्खन----------------- १ छोटा चम्मच
नमक---------------------- स्वादानुसार
लाल मिर्च पाउडर---------------जितनी से लार ग्रन्थियां और अश्रुग्रन्थियां भलीभांति स्रावित हो जायें.(सबकी अपनी अपनी लिमिट होता है ना)
चाट मसाला------------------ ४ छोटे चम्मच
नींबू का रस------------------१/४ छोटी कटोरी

विधि

प्रेशर कुकर में पीला मक्खन पिघला लें और उसमें भुट्टे डाल कर हिला लें.अब १/२ कटोरी पाने डाल कर कुकर का ढक्कन बंद कर के २-३ सीटी लगा लें.यदि चाहें तो इसी विधि से माइक्रोवेव में भुट्टे स्टीम कर लें.जब तक भुट्टे स्टीम होते हैं तब तक रसा तैयार कर लें.नीम्बू के रस में लाल मिर्च पाउडर,नमक और चाट मसाला डाल कर अच्छी तरह मिला लें, चाहें तो बहुत थोडा सा मक्खन भी डाल लें,स्वाद के लिये.(मक्खन का आइडिया मेरा ही है, बाबा का नहीं).बाज़ार में आमतौर पर नींबू की जगह टाटरी का प्रयोग किया जाता है,स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से मुझे नीम्बू उचित लगता है. जैसे ही भुट्टे पक जायें, आप कुकर का ढक्कन खोल कर चेक कर लें.इन गर्मागर्म भुट्टों को तैयार रसे में अच्छी तरह लपेट लें.चम्मच में रसा ले कर धीरे धीरे भुट्टों पर गिरायें.जब सारा रसा इस प्रकार से खत्म हो जाये तो बिना किसी का लिहाज करे रसेदार छल्लियों पर टूट पडें.नर्म, मीठे किन्तु चरपरे भुट्टे खा कर मुझे जरूर बतायें अश्रुग्रन्थी और लारग्रन्थी का हाल.

Thursday, June 5, 2008

रेशमी परांठे ..

अपने नाम की तरह हैं यह .इसके लिए आपको चाहिए
आलू उबले हुए आधा किलो
मैदा आधा किलो
नमक स्वादानुसार
तेल या देसी घी

आलुओं को गर्म छील कर मेश कर ले हलके गर्म रह जाए तो इन्ही आलुओं में मैदा और नमक दाल कर गूँथ ले ,पानी नही डालना है बिल्कुल भी .गूँथ कर उसी वक्त पराँठे बनाने हैं नही तो ढीला पढ़ जायेगा यह .इस आटे से लोइयाँ बना कर बेल ले और चकले पर मैदा लगा कर ही बेलें फ़िर इसको नॉन स्टिक तवे पर पकाए ..तेल बहुत कम लगेगा इस में हाँ जिन्हें थोड़ा तला हुआ पसंद है और मोटापे का डर नहीं है वह इसको ज्यादा घी लगा कर भी बना सकते हैं यह परांठे सूखे पिंडी चनों के साथ बहुत स्वाद लगते हैं ..