Saturday, September 27, 2008
Sunday, September 21, 2008
लौकी के कोफ्ते
बड़ा डर टाइप लग रहा है, एक नौसिखिया बेचलर एक्सपर्ट लोगों की मंडली में शामिल हो कर विधि बता रहा है॥ दिल में 'धरती फट जाए और मैं इसमे समा जाऊँ', वैसे वाली फीलिंग आ रही है!
खैर, ओखली में सर दिया तो मूसल से क्या डरना।
सामग्री:
लौकी
बेसन
आलू (आवश्यक नहीं)
प्याज २ बारीक कटे हुए
टमाटर २ छोटे छोटे कटे हुए (टमाटर की प्यूरी हो तो और बेहतर)
हल्दी पीसी १/२ चम्मच
धनिया पिसा २ चम्मच
लाल मिर्च पीसी १/४ चम्मच
नमक स्वाद अनुसार
लौकी को छील कर ६ इंच के टुकड़े कर लें। इसको उबाल लीजिये, कुकर की एक सीटी काफ़ी होगी। ठंडा कर के इसके बीज निकाल दीजिये। (मैं ऐसे करता हूँ, आप चाहें तो बीज निकालने के बाद उबलने के लिए रखिये, बस टुकड़े बड़े होने चाहिए नहीं तो आगे थोडी मुश्किल हो सकती है.)
लौकी को मुट्ठी में दबाकर पानी निकाल दीजिये (यह पानी फेकने के बजाये आता गूथने के काम में उपयोग कीजिये) इस दबाई हुई लौकी में नमक, मिर्च मिला लीजिये। अब आप चाहे तो उबले और मैश किए हुए आलू मिला सकते हैं। बेसन मिलाइए जब तक आप इस मिश्रण से छोटे छोटे गोले नहीं बना पाते। गोले थोड़े ठोस होने चाहिए, ये न हो कि ग्रेविटी से ये गोल से चपटे हो जाएं!
इन गोलों को तेल में तल लीजिये जब तक ये भूरे-लाल न हो जाएं।
तेल गर्म कीजिये, प्याज सुनहरे होने तक भून लीजिये (चुटकी भर नमक डालने से यह प्रक्रिया तेज़ हो जाती है!) टमाटर (या टमाटर की प्यूरी ४ चम्मच) और बाकी मसाले डाल कर दो मिनिट पकाइए. ग्रेवी अच्छी सी हो तो मज़ा ही कुछ और होता है! पानी ज़्यादा मत डालियेगा।
अब इस ग्रेवी में तले हुए गोले डाल दीजिये। थोड़ी देर तक ढक कर पकने दीजिये जिससे ग्रेवी का स्वाद इन के अन्दर तक समा जाए।
लौकी के कोफ्ते बन गए :)
(कुछ गलती हुई हो तो नादान समझ कर माफ़ कीजियेगा। इसको बेहतर बनाने के तरीके आपको पता ही होंगे, वो भी बताइयेगा.)
Posted by Abhishek at 9:22 AM 8 comments
