दाल रोटी चावल सदियों से नारी ने इसे पका पका कर राज्य किया हैं , दिलो पर , घरो पर। आज नारी बहुत आगे जा रही हैं सब विधाओं मे पर इसका मतलब ये नहीं हैं कि वो अपना राज पाट त्याग कर कुछ हासिल करना चाहती हैं। रसोई की मिलकियत पर से हम अपना हक़ तो नहीं छोडेगे पर इस राज पाट का कुछ हिस्सा पुरुषो ने होटल और कुछ घरो मे भी ले लिया हैं।

हम जहाँ जहाँ ये वहाँ वहाँ

Saturday, October 1, 2011

"जाजर्यो/ जाजरियो" की रेसिपी



आदरणीय रचना
नमस्कार
मक्के के हलवे की रेसेपी लिखी है मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि आप इस मेरी इस रेसेपी को अपने "दाल चावल रोटी" ब्लॉग पर लगायें।
धन्यवाद

सागर चन्द नाहर
॥दस्तक॥ , तकनीक दस्तक , गीतों की महफिल



इस स्वादिष्‍ट हलवे को राजस्थानी में "जाजर्यो/ जाजरियो" कहते हैं।
बनाने से पहले ध्यान देने योग्य बातें:
मक्‍काई का हल्वा बनाने के लिए अन्य मिठाईयों की तुलना में अधिक मेहनत और समय लगता है।


सामग्री:
6 हरे और कोमल दानों वाले देशी ( स्वीट कोर्न नहीं) भुट्टे, जिनके दानों को नाखुन से दबाने पर दूध निकलता हो।
शुद्ध घी 200 ग्राम, शक्कर 200 ग्राम ( स्वादानुसार कम या ज्यादा की जा सकती है)
काजू, किशमिश और अपने मनपसन्द कटे हुए सूखे मेवे 1 कप, 1 लीटर पानी


बनाने से पहले की तैयारी।
भुट्टों को छील लें और ध्यान रखें कि उसमें भुट्टे की मूछें (बाल) ना रहने पाये
भुट्टों को छलनी या किसनी पर किस लें, ध्यान रखें कि मक्की के छिलके किसते नीचे ना जायें वैसे छिलका ऊपर जाली में रह जाता है, उसे निकालते जायें और फेंक दे।

विधी:


  • एक मोटे पैंदें वाली कड़ाही में घी तेज गर्म करें जब घी अच्छी तरह गर्म हो जाये किसी हुई मक्‍का को घी में डाल दें और चम्मच या खुरपे से हिलाते जाएं। इस दौरान गैस की आँच एकदम धीमी रखें, आपको कम से कम 45-50 मिनिट तक इसे हिलाते रहना पड़ेगा, हिलाते समय चम्मच बिल्कुल रुके नहीं वर्ना हल्वा चिपक जायेगा और जल जायेगा। चित्र क्रमांक 1-2
  • अब इसमें से पानी उड़ जायेगा और घी भी गायब हो जायेगा और यह एकदम सूख जायेगा मानों आप मक्की की सूजी को भून रहे हों। इस समय तेज खुशबु भी आने लगेगी। पदार्थ का रंग लाल होने लगेगा, अभी कुछ देर और सेकें। चित्र-3

  • अब दूसरे गैस पर पानी गर्म करें, पानी उबलने तक गर्म करें चित्र-6

  • पहले वाले गैस पर हलवा एकदम लाल होने लगे (चित्र-4) ध्यान रखें कि जल कर काला ना हो जाये, तब खौलता हुआ गर्म पानी उसमें सावधानी से डाल दें, और अब धीरे धीरे हिलाएं लेकिन रुके नहीं वर्ना गांठे पड़ जायेंगी।चित्र-5

  • कुछ देर में पानी उड़ने लगेगा अब आप इसमें सूखे मेवे डाल दें, और हिलाते रहें। चित्र 7

  • जब पानी एकदम उड़ जाये आप इसमें चीनी डाल दें। चित्र 8-9

  • कुछ देर और हिलायें जब शक्कार घुल जायेगी वापस अपने आप घी दिखने लगेगा। अगर आपको यहाँ घी कम दिखता है तो और अगर आपका स्वास्थय इजाजत दे तो थोड़ा घी और डालें। चित्र 10-11-12

  • बस हल्वा तैयार है, गर्मा-गर्म परोसें और सूखे मेवों की सजावट करें और खाएं। यह गर्म तो स्वादिष्‍ट लगता है ही, ठंडा होने पर भी अच्छा लगता है। चित्र 13




6 comments:

मनोज कुमार said...

श्रीमती जी को रेसिपी थमा दी है। अब देखें कब यह प्रयोग (सफल) होता है।

Patali-The-Village said...

ek bar dekhne men to munh men pani aagaya hai|

Udan Tashtari said...

अगली ट्रिप में हैदराबाद जाकर सागर के घर पर चखेंगे. :)

स्वादिष्ट लग रहा है मामला.

विजय said...

hmmm...ye bahut achcha lagta hai..aapka blog bahut achcha laga.

Bhagat Singh Panthi said...

मुंह में पानी आ गया. सुन्दर फोटो

अल्पना वर्मा said...

बहुत बढ़िया!