दाल रोटी चावल सदियों से नारी ने इसे पका पका कर राज्य किया हैं , दिलो पर , घरो पर। आज नारी बहुत आगे जा रही हैं सब विधाओं मे पर इसका मतलब ये नहीं हैं कि वो अपना राज पाट त्याग कर कुछ हासिल करना चाहती हैं। रसोई की मिलकियत पर से हम अपना हक़ तो नहीं छोडेगे पर इस राज पाट का कुछ हिस्सा पुरुषो ने होटल और कुछ घरो मे भी ले लिया हैं।

हम जहाँ जहाँ ये वहाँ वहाँ

Saturday, May 31, 2008

आलूबुखारा चटनी/RED PLUM PRESERVE



आजकल बाज़ार में आलूबुखारा बहुत आया हुआ है.इस फ़ल का लाल रंग सब को बहुत लुभाता है किन्तु कई बार अधिक खट्टा होने के कारण यह घर आकर भी यूं का यूं ही पडा रह जाता है.यदि आप के घर भी खट्टा आलूबुखारा न्याय पाने के लिये तरस रहा है तो मेरी सलाह मान कर इसकी चटनी बना लीजिये.यदि रेसि्पी पसंद आये तो बाज़ार से ला कर भी बना लीजिये.यह पूरे साल भर चलने वाली चटनी है . आगे बढने से पहले आपके सामने इसके गुण उजागर कर दूं.यह चटनी भूख बढाती है और साथ ही साथ अजीर्ण भी रोकती है.स्वादिष्ट इतनी कि जार खोलते ही सब के सब लार टपकाने लगते हैं.जब कभी मुंह कसैला सा लगे,स्वाद खराब हो रहा हो तो ज़रा सी चटनी खा लें,मुंह खुल जाएगा.यह विधि मैंने अपने कालेज के होम-साइन्स विभाग में जाकर सीखी थी.खुद साइन्स की विद्यार्थी थी किन्तु मेरे रसोई प्रेम के कारण होम-साइन्स विभाग की प्राध्यापिकायें मुझ पर अतिरिक्त स्नेह रखती थीं.आगे भी वहां सीखी हुई फ़्रूट प्रिजर्वेशन की कई रोचक और आसान विधियां आप के साथ बाटूंगी.फ़िल्हाल पेश है :आलूबुखारा चटनी/RED PLUM PRESERVE

सामग्री

आलूबुखारा ------------- १/२ किलो
नीम्बू का रस------------ १/२ किलो
नमक----------------- १२५ ग्राम (अन्दाजन १०-१२ छोटे चम्मच)
काली मिर्च-------------- २५ ग्राम (२-३ छोटे चम्मच)
जीरा------------------- ५० ग्राम
चीनी------------------- ७५० ग्राम
छोटी इलायची------------- १० नग
किशमिश --------------- १२५ ग्राम
छुहारा ----------------- १२५ ग्राम (लम्बा-महीन कतरा हुआ)
अदरक ---------------- २५ ग्राम

बनाने की विधि


१. सबसे पहले लाल पके हुए आलूबुखारों को अच्छी तरह से धो कर नीम्बू के रस में १२ घण्टों के लिये भिगो कर रख दें.ध्यान रहे कि भिगोने के लिये जो पात्र काम में लिया जा रहा है, वो धातु का ना हो.चीनी मिट्टी या शीशे का हो.
२. जीरे को मन्दी आंच पर भून लें.साथ ही इसमें नमक, काली मिर्च,छोटी इलायची मिलाकर महीन पीस लें और कपडछन कर लें.
३. नीम्बू के रस में भीगे हुए आलूबुखारों को अच्छी तरह से मसल कर गुठलियां निकाल लें.अब इस नीम्बू के रस और आलूबुखारे के गूदे में सारे पिसे मसाले मिला लें.चीनी भी इसी में मिला लें और एक सार होने तक हाथ या कडछी से मिलाती रहें.
४. इस मिश्रण में छुहारे और किशमिश मिला कर एक चौडे मुंह की बोतल में भर कर सील कर दें.
५. इस बोतल को ४-५ दिनों तक धूप में रख लें, आलू बुखारे की चटनी तैय्यार है.

5 comments:

रचना said...

aaj kal aandhi bahut aa rahee haen
achar aur chantni dono he kharab toh nahin ho jyaegee illa ????!!!!
the receipe is mouth watering

रंजू ranju said...

वाह यह मैंने पहली बार पढी विधि ..कोशिश करेंगे फ़िर बताते हैं कि क्या बना असल में मुझसे :)

mehek said...

aare wah pehli bar suna hai alubukhara ki chatney ke bare mein,muh mein abhi se pani aa raha hai,so easy to mk,will definetly try it.

Lavanyam - Antarman said...

sounds so yumm ...will deffinately try - thanx Ila ji ...

mamta said...

इला जी आज तक इस रेसिपी के बारे मे ना कभी पढ़ा और ना सुना।
अब तो इसे बना कर ही देखना पड़ेगा.